- जिंदगी की दौड़ पर हिंदी लेख
- जीवन का असली सच हिंदी में
- आधुनिक जीवन की सच्चाई
- इंसान जिंदगी में क्या खो रहा है
ज़िंदगी एक लंबी दौड़ बन चुकी है, और हम सब बिना रुके उसमें भाग रहे हैं। सबसे अजीब बात यह है कि इस दौड़ में शामिल लगभग हर इंसान थका हुआ है, परेशान है, भीतर से खाली महसूस करता है, लेकिन फिर भी कोई रुककर यह पूछने की हिम्मत नहीं करता कि आखिर यह दौड़ जा कहाँ रही है और वहाँ पहुँचकर सच में मिलने क्या वाला है। बचपन में हमें लगता था कि अगर एक साइकिल मिल जाए तो जिंदगी पूरी हो जाएगी। फिर साइकिल मिली तो स्कूटर का सपना आया, स्कूटर मिला तो कार चाहिए थी, कार मिली तो बड़ी कार, फिर बड़ा घर, फिर ज्यादा पैसा, फिर दूसरों से ज्यादा सफल दिखने की इच्छा। इंसान पूरी जिंदगी “बस थोड़ा और” के पीछे भागता रहता है, लेकिन यह “थोड़ा और” कभी खत्म नहीं होता। एक इच्छा पूरी होती नहीं कि दूसरी सामने खड़ी हो जाती है। धीरे-धीरे आदमी कम चीज़ें नहीं, बल्कि अपनी शांति, अपना समय और अपना असली जीवन खोने लगता है।
