पैसे की दौड़ में इंसान क्या खो देता है पैसा कमाते कमाते जिंदगी कैसे बर्बाद होती है परिवार को वक्त क्यों नहीं दे पाते लोग नौकरी और परिवार में बैलेंस कैसे करें जिंदगी में पैसे से ज्यादा जरूरी क्या है सोचो एक बार, सिर्फ एक बार। आपने पूरी जिंदगी काम किया। सुबह उठे, दफ्तर गए, शाम को थके-हारे लौटे। महीने के आखिर में तनख्वाह आई, कुछ खर्च हुआ, कुछ बचाया। फिर अगला महीना। फिर वही। तीस साल ऐसे ही निकल गए। और जब रिटायर हुए, तो पहली बार घर में बैठकर बाहर का नजारा देखा — और नहीं पता था कि अब क्या करें। जिंदगी जीना तो सीखा ही नहीं था कभी। यह सिर्फ आपकी कहानी नहीं है। यह हम सबकी कहानी है। एक दुकानदार है — रोज सुबह सात बजे दुकान खोलता है, रात दस बजे बंद करता है। बीच में एक बार घर जाता है खाना खाने। बच्चे सो जाते हैं जब तक वो आता है। बीवी अकेले बैठी रहती है। त्योहार आते हैं, वो दुकान पर होता है — क्योंकि त्योहार पर तो बिक्री ज्यादा होती है। उसने कभी नहीं सोचा कि त्योहार सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं आता, वो इसलिए आता है कि तुम अपनों के साथ बैठो। एक नौकरीपेशा आदमी है — IT कंपनी में काम करता है। लैपटॉप...
Sanskar Ganga - विचारों की गहराई, जीवन के मूल्यों के साथ
संस्कार गंगा एक हिंदी ब्लॉग है जो उन बातों को शब्द देता है जो अक्सर हम महसूस तो करते हैं, पर कह नहीं पाते। हम यहाँ बात करते हैं इंसानियत की, करुणा की, उन बेज़ुबान जीवों की जो हमारी दया के पात्र हैं, और उन रिश्तों की जो हमें इंसान बनाते हैं। हर पोस्ट एक छोटी-सी कोशिश है — कि हम थोड़ा रुकें, थोड़ा सोचें, और थोड़ा बेहतर बनें।